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शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

बाहुबली व राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने के लिए बिहार सरकार और प्रशांत भूषण ने याचिका दायर की है। आज कोर्ट में दोनों याचिकाओं पर सुनवाई होगी।

बिहार सरकार ने याचिका दायर करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय में राज्य के पक्ष को उचित ढंग से नहीं सुना गया और गवाहों की सुरक्षा से संबंधित अदालत द्वारा पूर्व में जताई गई सारी चिंताओं को दरकिनार करके इस हिस्ट्रीशीटर को जमानत दी गई।

जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की ओर दायर याचिका पर आज सुनवाई करना स्वीकार किया। भूषण ने सीवान निवासी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की ओर से याचिका दायर की। चंदा बाबू के तीन बेटों की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन अभियुक्त हैं।

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने बिहार में मारे गए तीन भाइयों के पिता चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू की ओर से दायर याचिका का उल्लेख शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किया। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने के बाद क्षेत्र में सनसनी और डर का माहौल बन गया है। उनके कुछ और तर्क रखने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर 19 सितंबर को सुनवाई की जाएगी। शहाबुदीन को पिछले सात सितंबर को पटना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने जमानत दी थी।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में दो भाइयों गिरीश और सतीश की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को दिसंबर 2015 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मामले में इकलौते गवाह मृतकों के भाई राजीव रोशन की भी 16 जून 2014 को हत्या कर दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पटना हाई कोर्ट का जमानत देने का आदेश कानून का मजाक उड़ाना है, क्योंकि हत्या के केस में अभी तक गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं। साथ ही हाईकोर्ट ने इस तथ्य को भी अनदेखा कर दिया कि शहाबुद्दीन पर 13 मई 2016 को सिवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या का भी आरोप है। इसके अलावा 18 मई 2016 को सिवान जेल में छापे के दौरान उसके पास से 40 मोबाइल भी बरामद हुए।

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