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आज 14 गांठों वाले धागे अनंत की पूजा करें, कष्‍ट दूर होंगे, खुशहाली आएगी

आज है भादो माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी। यानी अनंत चतुर्दशी। आज के दिन 14 गांठों वाले धागे जिसे अनंत कहा जाता है, कि पूजा करें। इससे आपके घर अनंत काल तक खुशहाली आएगी। महाभारत काल में श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने भी इस व्रत को किया था।

ये है मान्यता

आज अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्त सूत्र बांधा जाता है। मान्यता है कि जब पांडव जुएं में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनन्त सूत्र धारण किया। अनन्त चतुर्दशी व्रत के प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए।

पुरुष दाहिनी जबकि औरतें बाईं भुजा में बांधें अनंत

आज अनंत की पूजा होती है और भगवान सत्यनारायण यानी विष्णु जी की आराधना होती है। आज देशभर में भक्ति भाव से श्रद्धालु भगवान श्री नारायण की पूजा होगी। पूजा-अर्चना के बाद व्रत धारण करने वाले अनंत के निमित्त आराधना करेंगे। इसके बाद पुरुष दक्षिण भुजा में एवं महिलाएं बायीं भुजा में अनंत सूत्र धारण करेंगी।

शास्‍त्रों के मुताबिक अनंत चतुर्दशी का व्रत वैसे तो नदी तट पर करना श्रेष्ठकर होता है। लेकिन किसी मंदिर, पर्वत शिखर या फिर घरों में पूजा गृह में कथा श्रवण का भी श्रेयस्कर परिणाम मिलता है। अनंत राखी के समान रूई या रेशम के कुंकू रंग में रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठे होती हैं। इन्हीं धागों से अनंत का निर्माण होता है। यह व्यक्तिगत पूजा है, इसका कोई सामाजिक धार्मिक उत्सव नहीं होता।

ब्राह्मणों को दान देना है अनिवार्य

अग्नि पुराण (1) के मुताबिक व्रत करने वाले को धान के एक प्रसर आटे से पूड़ी बनानी होती हैं, जिनकी आधी वह ब्राह्मण को दे देता है और शेष स्वयं प्रयोग में लाता है। पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करने से व्रत फलदायी होता है। ‘हे वासुदेव, इस अनंत संसार रूपी महासमुद्र में डूबे हुए लोगों की रक्षा करो तथा उन्हें अनंत के रूप का ध्यान करने में संलग्न करो, अनंत रूप वाले प्रभु तुम्हें नमस्कार है।’ मंत्र से हरि की पूजा करके तथा अपने हाथ के ऊपरी भाग में या गले में धागा बांध कर या लटका कर (जिस पर मंत्र पढ़ा गया हो) व्रती अनंत व्रत को पूर्ण करता है। यदि हरि अनंत हैं तो 14 गांठें हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों की प्रतीक हैं।

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