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अवैध भवनमालिकों को झटका, जिम्मेदारी से पीछे हटी सरकार, इंजीनियरों का भी इंकार

हिमाचल सरकार ने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए भले ही विधानसभा में संशोधित टीसीपी विधेयक पास कर दिया हो, लेकिन इन भवनों की जिम्मेदारी लेने से सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। प्रदेश सरकार ने इसकी पूरी जिम्मेदारी स्ट्रक्चर पास करने वाले इंजीनियरों पर डाली है।

इंजीनियर ने भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रमाण पत्र सिर्फ उन्हें ही दिया जा सकता है जो भवन उनकी देखरेख में बने हैं। इंजीनियरों की देखरेख के बिना बने भवनों की जिम्मेदारी नहीं ली जा सकती है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने धारा-7 (क) में स्पष्ट कर दिया है कि भवनों को नियमित करने के लिए इंजीनियर का संरचनात्मक मजबूती प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।

इसके बगैर अवैध भवन नियमित नहीं होंगे। अब प्रदेश सरकार के बाद इंजीनियरों की ओर से भी जिम्मेदारी न लेने पर अवैध भवनों का नियमितीकरण लटक सकता है। हिमाचल में 30 हजार के करीब अवैध भवन हैं। इनमें कुछेक मकान ही इंजीनियरों की सलाह पर बने हैं जबकि अधिकांश भवन लोगों ने अपनी मर्जी से बनाए हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि इन भवनों की जिम्मेदारी कौन लेगा? इंजीनियरों के पास लगातार शिकायतें आ रही है। शिमला के टुटू में एक भवन मालिक ने ईंटों के पिलरों पर ही मकान खड़ा कर दिया है। दूसरा, जिन भवन मालिकों का नक्शा 3 मंजिला पास है, उक्त भवन को 6 मंजिला बनाया जाना भूकंप दी दृष्टि से खतरनाक हो सकता है।

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