gujrat-mh1-mhone

कोर्ट ने महिला का गुजाराभत्ता रोका, ‘पढ़ी-लिखी हैं तो खुद कमाकर बच्चों को पालें’

एक महिला को पति के खिलाफ अदालत जाना महंगा पड़ गया। अपने फैसले में कोर्ट ने महिला को मिलने वाले गुजाराभत्ता पर भी रोक लगा दी और कहा कि पत्नी पढ़ी-लिखी हैं खुद कमाकर बच्चों को पाले।

महिला के मुताबिक, तीन बच्चों की पढाई पति के गुजाराभत्ता नहीं देने से रुक गई। मगर अदालत को पता चला कि यह महिला स्नातक है, जबकि उसका दसवीं पास पति छोटी सी दुकान चलाता है। इस पर कोर्ट ने महिला को पति से मिलने गुजाराभत्ते पर रोक लगा दी और कहा कि पत्नी पढ़ी-लिखी है, वह खुद कमाकर बच्चों को पाले।

द्वारका स्थित स्पेशल जज हरीश दुदानी की अदालत ने इस मामले में महिला को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सिर्फ पति को सबक सिखाने के लिए उसने अपने तीन नाबालिग बच्चों की पढ़ाई रुकवा दी, जबकि वह खुद पढ़ी-लिखी है। वह चाहती तो बच्चों के भविष्य के लिए नौकरी की तलाश करती। मगर उसने पति के साथ विवाद में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।

अदालत ने महिला के गुजाराभत्ता पाने के अधिकार को समाप्त करते हुए कहा कि अपने जीवन-यापन के लिए वह खुद प्रयास करे। यही परिवार के हित में होगा। इससे दूसरों को सबक भी मिलेगा। ताकि किसी के भविष्य से खिलवाड़ न हो।

अदालत ने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने की सलाह दी
अदालत ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए उनका दाखिला सरकारी स्कूल में कराने की सलाह दी है। अदालत के अनुसार, दंपति के विवाद में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। इसका सीधा असर उनके मासूम मन पर पड़ता है।

बच्चों को गुजाराभत्ता दें
अदालत ने पिता की कमाई के हिसाब से बच्चों के गुजर-बसर के लिए प्रति माह दो हजार रुपये देने के आदेश को लागू रखा है। यह आदेश निचली अदालत ने दिया था। अदालत ने कहा है कि पिता से मिलने वाले गुजाराभत्ते के अलावा मां भी अपनी तरफ से बच्चों के भविष्य को सही दिशा देने का प्रयास करे।

5 साल से दिल्ली में रह रही

शिकायतकर्ता महिला की शादी वर्ष 2003 में यूपी के अम्बेडकर नगर जिले के एक गांव में रहने वाले युवक से हुई थी। इनके तीन बच्चे हैं। महिला वर्ष 2011 से दिल्ली स्थित अपने मायके में रह रही है। महिला का कहना है कि पति के आर्थिक मदद नहीं देने से बच्चों की पढ़ाई बीच में रुक गई है।

पति की मासिक कमाई दस हजार रुपये

महिला का कहना था कि पति गांव में किराने की दुकान चलाता है, जिसकी मासिक आय दस हजार रुपये है। मगर अदालत ने माना कि पति अपने पिता की दुकान चला रहा था। वहीं, पति ने बताया कि पत्नी उसे एक बार जबरन दिल्ली लेकर आ गई थी, लेकिन ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं होने की वजह से उसे वहां नौकरी नहीं मिली। महिला उस पर दिल्ली में रहने का दबाव बना रही थी। इसी बात को लेकर पत्नी ने उसे छोड़ दिया।

Share With:
Rate This Article