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सिद्धू के नए पैंतरे से कैसे बदले राजनीति के समीकरण, एक विश्लेषण

क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने नवजोत सिंह सिद्धू के नए पैंतरे ने पंजाब की राजनीति के समीकरण कई मायनों में बदल दिए। सिद्धू के 18 जुलाई 2016 को अचानक राज्यसभा से इस्तीफे के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि वह पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल होंगे। हालांकि, कई अटकलों के बीच जब आप नेताओं का सिद्धू के प्रति रुख बदला तो सिद्धू को कांग्रेस ने आमंत्रण दिया, लेकिन उसमें गर्मजोशी कम, हालात की मजबूरियां ज्यादा झलक रही थीं।

लगभग डेढ़ माह की चुप्पी के बाद अचानक सिद्धू की ओर से आई ‘गुगली’ ने आप और कांग्रेस को पूरी तरह से बोल्ड कर दिया। सिद्धू के नए पैंतरे से जहां आप और कांग्रेस चुप हैं, वहीं शिअद प्रसन्न नजर आ रहा है। शिअद को उम्मीद है कि नए समीकरण में उसे लाभ ही होगा। सिद्धू के अलावा ओलंपियन परगट सिंह और लुधियाना में अच्छा खासा आधार रखने वाले बैंस बंधुओं की चौकड़ी ने आवाज-ए-पंजाब से प्रदेश के चुनावी दंगल को रोचक बना दिया।

यदि आवाज-ए-पंजाब कुछ हद तक भी अपने मिशन में कामयाब हो जाती है तो आगामी विधानसभा चुनाव चतुष्कोणीय बन जाएगा। शिअद माहिरों का कहना है कि सिद्धू को इसका अहसास हो गया था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी का आधार कम होता जा रहा है और आप के साथ उसका भविष्य अच्छा नहीं है, इसलिए उन्होंने नई पार्टी के साथ लक्ष्य हासिल करने की ठानी।

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