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हिंसा के दौरान राजनाथ सिंह के कश्मीर दौरे से क्या हासिल हुआ?

भारत प्रशासित कश्मीर में जारी गतिरोध अगर जल्द ख़त्म न हुआ, वहां प्रदर्शन जारी रहे तो ये आंदोलन कट्टरपंथी ताकतों के हाथों में जा सकता है।

भारत विरोधी और इस्लामिक कट्टरपंथी सैयद सलाहुद्दीन और मौलाना मसूद अज़हर का असर दक्षिण कश्मीर में पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है। जानकारों को डर है कि यदि केंद्र सरकार और कश्मीर के आंदोलनकारियों के बीच गतिरोध जारी रहा तो युवाओं के बीच इन लोगों का असर बहुत ज़्यादा बढ़ सकता है।

पिछले महीने 8 जुलाई को हिज़्बुल मुजाहिदीन के चरमपंथी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद वहां जारी हिंसा के कारण सामान्य जनजीवन ठप पड़ा है।

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