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AFI की सफाई पर बोलीं जैशा, ‘सही हूं महासंघ से लड़ भी सकती हूं’

रियो ओलंपिक के मैराथन इवेंट को लेकर भारतीय एथलीट ओ.पी. जैशा के खुलासे के बाद एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने अपनी सफाई में कहा है कि खुद जैशा और उनके कोच ने रेस के बीच एनर्जी ड्रिंक लेने से इनकार किया था।

इसके बाद जैशा ने महांसंघ की सफाई पर कहा, ‘महासंघ का कोई भी रिप्रेजेंटेटिव वहां मौजूद नहीं था तो उन्हें सच क्या है कैसे पता? अब हर जगह कैमरा मौजूद होते हैं उन्हें पहले उनकी फुटेज देखनी चाहिए और तब उन्हें इसका जवाब मिल जाएगा।’

जैशा ने कहा, ‘मैं इतना बड़ा झूठ क्यों बोलूंगी जब मैंने अपने स्पोर्ट्स करियर में आज तक कभी कोई शिकायत नहीं दर्ज की है। मैं सरकार और महासंघ के खिलाफ लड़ भी सकती हूं और शायद जीत भी जाऊं। मैं और मेरा भगवान जानते हैं कि सच क्या है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।’

सोमवार को जैशा ने रियो ओलंपिक में महिला मैराथन स्पर्धा को याद करते हुए कहा था कि मैं वहां मर सकती थी क्योंकि उन्हें अधिकारियों द्वारा पानी और एनर्जी ड्रिंक मुहैया नहीं कराया गया जबकि भारत को निर्धारित स्टेशन दिए गए थे।

‘ना एनर्जी ड्रिंक मिली और ना कुछ खाना’
जैशा रियो ओलंपिक की महिला मैराथन स्पर्धा में निराशाजनक दो घंटे 47 मिनट 19 सेकेंड के समय से 89वें स्थान पर रही थी। जैशा ने कहा, ‘वहां काफी गर्मी थी। स्पर्धा सुबह 9 बजे से थी, मैं तेज गर्मी में दौड़ी। हमारे लिए कोई पानी नहीं था, न ही कोई एनर्जी ड्रिंक थी और न ही कोई खाना। केवल एक बार आठ किलोमीटर में रियो आयोजकों से मुझे पानी मिला जिससे कोई मदद नहीं मिली। सभी देशों के प्रत्येक 2 किमी पर अपने स्टाल थे लेकिन हमारे देश का स्टाल खाली था।’

‘भारतीय बोर्ड दिखे लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था’
जैशा फिनिश लाइन पर मैराथन पूरी करने के बाद गिर गई थीं और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा जहां उनके कोच निकोलई स्नेसारेव की एक डॉक्टर से बहस हो गई और फिर उन्हें स्थानीय पुलिस ने आधे दिन के लिए हिरासत में लिया। जैशा ने कहा, ‘हमें हमारे तकनीकी अधिकारियों द्वारा ड्रिंक दी जानी थी, यह नियम है। हम किसी अन्य टीम से पानी नहीं ले सकते। मैंने वहां भारतीय बोर्ड देखा लेकिन वहां कुछ नहीं था। मुझे काफी परेशानी हो रही थी। मैं रेस के बाद बेहोश हो गई। मुझे ग्लूकोज दिया गया, मुझे लगा कि मैं मर जाऊंगी।’

‘कोच को लगा था मैं मर गई हूं’
जैशा ने स्नेसारेव की बहस के कारण को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘मेरे कोच बहुत गुस्से में थे और वह डॉक्टरों से भिड़ गए। कोच ने सोचा कि मैं मर गई हूं। उन्होंने डॉक्टरों को धक्का दिया और मेरे कमरे में घुस गए क्योंकि वह जानते थे कि अगर मुझे कुछ भी हो गया तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।’ इस धाविका ने दावा किया कि उसने जब स्टॉल पर पूछा कि उसे पानी क्यों नहीं मुहैया कराया गया तो अधिकारियों से उसे कोई जवाब नहीं मिला। जैशा ने कहा, ‘मैंने अधिकारियों से पूछा कि हमारे लिए वहां पानी क्यों नहीं था लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला। मैं नहीं जानती कि वे क्या कर रहे थे। भारतीय एथलेटिक्स दल में काफी लोग थे, कोई भी यह काम कर सकता था।’

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