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‘जिगिषा घोष अगर जिंदा होती तो आज ऊंचे मुकाम पर होती’

जिगिषा घोष के हत्यारों की सजा पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने प्रोबेशन अधिकारी की उस रिपोर्ट पर गौर किया और मृतका के भविष्य को लेकर टिप्पणी की कि अगर जिगिषा आज जीवित होती तो निश्चित तौर पर ऊंचे मुकाम पर होती।

साकेत स्थित एडिशनल सेशन जज संदीप यादव की अदालत ने अपने फैसले में माना है कि जिगिषा एक प्रतिभाशाली लड़की थी। उसने जिस तरह से 28 साल की उम्र में कामयाबी की ऊंचाइयों को छुआ, वह उसके उच्च भविष्य की तरफ इशारा करता है।

अदालत ने यह भी माना कि जिगिषा परिवार में इकलौती कमाने वाली सदस्य थी। पिता स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय से सेवानिवृत थे। जिगिषा की आमदनी से घर की गुजर-बसर में मदद मिलती थी।

क्योंकि माता-पिता दोनों ही बढ़ती उम्र की कई बीमारियों से पीड़ित थे ऐसे में उनकी दवाइयों से लेकर अन्य तरह के खर्च उठाने की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। जिनका निर्वाह वह बहुत अच्छे तरीके से कर रही थी।

लेकिन इन अभियुक्तों की कू्ररता के कारण उसके बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह गए। अदालत ने माना कि वह एक कंपनी में एक कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर के तौर पर 45 हजार रुपये महीना कमा रही थी और अगर वह जीवित होती तो अब तक अपने करियर में काफी ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया होता।

मां है बीमार : प्रोबेशन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिगिषा की मां को हाईपरटेंशन, अथराइटिस, हाई ब्लड प्रेशर, थैलिसिमया एवं न्यूरो संबंधी बीमारियां हैं। पिता को भी उम्र संबंधी दिक्कत है। प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए बुजुर्ग माता-पिता को छह लाख रुपये का मुआवजा जुर्माना रकम में से तथा दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण को नियमानुसार मुआवजा राशि देने के निर्देश दिए है।

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