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दीपा के कोच बोले, ‘फूट-फूट कर रोई दीपा, मैं दुनिया का सबसे दुखी कोच’

रियो ओलंपिक में जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने अपने प्रदर्शन से पूरे देश को गर्वान्वित किया। रविवार रात को स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले दीपा मेडल से चूक गईं थी। इसके बाद भी वो मुस्कुराती नजर आ रही थीं लेकिन इस मुस्कान के पीछे छिपा दर्द खेलगांव लौटने के बाद दिखा।

खेलगांव पहुंचने के बाद दीपा फूट फूटकर रोई। उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी के लिए भी खुद को रोक पाना मुश्किल हो गया था। कोच नंदी ने कहा, ‘खेलगांव आने के बाद दीपा को संभालना मुश्किल हो गया था। मामूली अंतर से ब्रॉन्ज मेडल से चूकना हमारे लिए जिंदगी के सबसे बड़े दुख में से रहेगा।’ दीपा और उसके कोच पूरी शाम खेलगांव में एक दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।

‘हमारे लिए सबसे खराब स्वतंत्रता दिवस रहा’

कोच ने कहा, ‘हर कोई खुश था लेकिन हमारी तो दुनिया ही मानो उजड़ गई और वह भी इतने मामूली अंतर से। यह सबसे खराब स्वतंत्रता दिवस रहा। मैं धरती पर सबसे दुखी कोच हूं। यह दुख ताउम्र रहेगा।’ महिलाओं के वोल्ट फाइनल में दीपा का स्कोर 15.266 था और वह स्विट्जरलैंड की जिउलिया स्टेनग्रबर से पीछे रहीं जिसने 15.216 के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

‘विदेशी कोच की जरूरत नहीं’
रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद दीपा के पास तैयारी के लिए तीन महीने का ही समय था। कोच ने कहा, ‘हमने सिर्फ तीन महीने तैयारी की जबकि दूसरे जिम्नास्ट पूरे साल तैयारी करते हैं।’ यह पूछने पर कि क्या विदेश में प्रैक्टिस या कोचों के बारे में विचार किया जा रहा है, नंदी ने कहा, ‘मैं विदेशी कोचों के खिलाफ हूं। अगर हम कर सकते हैं तो उनकी क्या जरूरत है। हमें फिट रहने और उसे तोक्यो ओलंपिक 2020 तक फिट बनाए रखने के लिए उचित सुविधाएं चाहिए।’ उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण की तमाम सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘हमें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिली।’

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